मोहन दास करमचंद गाँधी , महात्मा कैसे बने?

#महात्मागाँधी

malini awasthi with Gandhi statue in Netherland

मोहन दास करमचंद गाँधी , महात्मा कैसे बने, इस सवाल का जवाब मात्र स्कूली किताबों को पढ़ गांधी को जानने वाले कभी नहीं जान सकते।
महात्मा गांधी के योगदान को भारत की स्वतंत्रता तक सीमित करनेवाले भी यह कभी नहीं समझ सकेंगे कि महात्मा गाँधी की सोच और बात का असर कितना सर्वव्यापी था, कितना सार्वभौमिक था।

जो व्यक्ति कालांतर में स्वयं इतिहास बन गया और इतिहास रच गया, उसकी दृष्टि युवावस्था में ही कितनी व्यापक और असरदार थी, यह हमारे बंधु देश मॉरीशस सूरीनाम फिजी त्रिनिदाद गयाना के गिरमिटिया भाइयों के इतिहास से जाना जा सकता है।
1873 से भारत से शुरू हुए ऐतिहासिक विस्थापन में सुदूर देशों को गए भारतियों के लिए आवाज़ उठाने वाले महात्मा गांधी थे।

उन्होंने स्वयं इन देशों की यात्रा की और वहां शिक्षा और जागरूकता की अलख जगाई। मॉरीशस में और सूरीनाम में गांधी जी ने अपने विश्वस्तों को भारतीय समाज के लिए निःशुल्क वकील के रूप में नियुक्त किया जिन्होंने गोरों से शोषित भारतीय समाज को अपने अधिकार के लिए लड़ने का नैतिक बल दिया। स्वयं दो से छः माह तक इन जगहों पर रह कर गांधी जी ने स्त्री शिक्षा, स्वास्थ्य स्वच्छता अनुशासन और कुरीतियों से लड़ने की शिक्षा दी। दक्षिण अफ्रीका से वापस भारत आने के पूर्व उन्हीने सभी विश्वशक्तियों से भारतवंशियों के शोषण का विरोध किया। यह महात्मा गांधी जी के निरंतर प्रयासों का परिणाम था कि भारत से जबरन बँधुआ मजदूरी के किये ले जाने वाले श्रमिकों का करार ब्रिटिश सरकार ने अंततः 1916 में ख़त्म कर दिया।

यही कारण है कि हालैंड मोरिशस सूरीनाम त्रिनिदाद गयाना फिजी के हमारे भारतवंशी महात्मा गाँधी को पूजते हैं, उन्हें भारत का प्रतीक मानते हैं।
क्या विलक्षण व्यक्तित्व रहा होगा महात्मा का। कहाँ कहाँ नज़र थी, और उसके लिए कितना उपक्रम! जबकि आज जैसे साधन न थे, परदेस जाकर रहना, अपनी जड़ों से दूर भेज दिए गए निराश गुलाम भारतीयों के बीच आत्मविश्वास और आशा का संबल कोई महात्मा ही बन सकता था।
गाँधी को पूरी तरह जानने का प्रयास कीजिये।
पाठ्यक्रम की पुस्तकों से बाहर निकालकर महात्मा गांधी को देखिये, पढ़िए, समझिये और और अपने बच्चों को समझाइये।

तीन दिन पहले नीदरलैंड्स में एक टीवी चैनल ने जब मेरा साक्षात्कार लेना चाहा, तो उनका सुझाव आया कि गांधी जी की मूर्ती के सामने साक्षात्कार हो।
आपके लिए साथ संलग्न चित्र परदेस में महात्माके साथ।

 

https://knowing.gandhism.info/

Ajinkya Gaikwad

I am preparing for civil services exam.i have completed my B.tech in Comp Sci from MIT A.bad.

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